गोविंद चले आओ, गोपाल चले आओ (Govind Chale Aao, Gopal Chale Aao)

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Krishna Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

गोविंद चले आओ,

गोपाल चले आओ,

गोविंद चले आओ,

गोपाल चले आओ,

मेरे मुरलीधर माधव,

मेरे मुरलीधर माधव,

नंदलाल चले आओ,

गोविंद चले आओ,

गोपाल चले आओ,

गोविंद चले आओ,

गोपाल चले आओ ॥

आँखों में बसे हो तुम,

धड़कन में धड़कते हो,

कुछ ऐसा करो मोहन,

स्वासों में समां जाओ,

कुछ ऐसा करो मोहन,

स्वासों में समां जाओ,

गोविंद चले आओ,

गोपाल चले आओ ॥

इक शर्त ज़माने से,

प्रभु हमने लगा ली है,

इक शर्त ज़माने से,

प्रभु हमने लगा ली है,

या हमको बुला लो तुम,

या खुद ही चले आओ,

या हमको बुला लो तुम,

या खुद ही चले आओ,

गोविंद चले आओ,

गोपाल चले आओ ॥

तेरे दर्शन को मोहन,

मेरे नैन तरसते है,

तेरे दर्शन को मोहन,

मेरे नैन तरसते है,

तेरे दर्शन को मोहन,

मेरे नैन तरसते है,

तेरे दर्शन को मोहन,

मेरे नैन तरसते है,

गोविंद चले आओ,

गोपाल चले आओ ॥

गोविंद चले आओ,

गोपाल चले आओ,

गोविंद चले आओ,

गोपाल चले आओ,

मेरे मुरलीधर माधव,

मेरे मुरलीधर माधव,

नंदलाल चले आओ,

गोविंद चले आओ,

गोपाल चले आओ,

गोविंद चले आओ,

॥ दोहा ॥

गोपाल चले आओ ॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

गोविंद चले आओ, गोपाल चले आओ | Govind Chale Aao, Gopal Chale Aao

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।