गोवर्धन महाराज तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो

चित्र विचित्र जी महाराज
श्री कृष्ण भजन भजन चित्र विचित्र जी
॥ दोहा ॥

गोवर्धन वासी प्रभु, परिक्रमा दे संसार।
चित्र विचित्र वंदन करे, जय जय गिरिवर धार॥

॥ चौपाई ॥

गोवर्धन महाराज तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो।
तोपे पान चढ़े तोपे फूल चढ़े, तोपे चढ़े दूध की धार॥
गोवर्धन महाराज तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो॥

तेरे कानों में कुंडल सोहे, गल वैजयंती माल।
सात कोस की परिक्रमा, देवे नर नारी सब हाल॥
मानसी गंगा स्नान करे, तर जाए सकल संसार।
गोवर्धन महाराज तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो॥

राधा कुंड और श्याम कुंड में, पावन प्रेम तरंगा।
गिरिराज धरण की जय जय बोले, भक्तन का संगा॥
कनिष्ठा उंगली पर धरियो, मिटायो इंद्र अहंकार।
गोवर्धन महाराज तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो॥

चित्र विचित्र कहे गिरिराजा, मेरी लाज बचाओ।
अपने चरणों में मुझको, तनिक सा ठांव दिलाओ॥
दूध चढ़ाऊं दीप जलाऊं, बारम्बार जोहार।
गोवर्धन महाराज तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो॥

॥ दोहा ॥

जय गोवर्धन महाराज की, जय बोले ब्रज धाम।
चित्र विचित्र शरण में, पूर्ण हो सब काम॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

श्री गिरिराज गोवर्धन जी महाराज की सात कोस परिक्रमा, दुग्धाभिषेक एवं पूजन का परम पावन ब्रज भजन।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।