गोरखनाथ

पारंपरिक
महादेव संत साहित्य Bhakt Gorakhnath Bhakt
॥ पावन पाठ ॥

भक्तिमालः गोरखनाथ

वास्तविक नाम - गोरखनाथ

अन्य नाम - गोरक्षनाथ, नवनाथ

गुरु - मत्स्येन्द्रनाथ

आराध्य - भगवान शिव

जन्म - 11वीं शताब्दी

जन्म स्थान - जायस सिटी, उत्तर प्रदेश

वैवाहिक स्थिति - अविवाहित

प्रख्यात - आध्यात्मिक संत

प्रसिद्ध - हठ योग, नाथ योगी संगठन, गोरखा, गोरखपुर

संस्थापक - नाथ मठ और मंदिर

सम्मान - महायोगी

गोरखनाथ एक हिंदू योगी, संत थे, जो भारत में नाथ हिंदू मठवासी आंदोलन के प्रभावशाली संस्थापक थे, उन्हें मत्स्येंद्रनाथ के दो उल्लेखनीय शिष्यों में से एक माना जाता है। गोरखनाथ का जन्म 11वीं सदी में संत कबीर के जन्म से कम से कम चार सदी पहले हुआ था।

गोरखनाथ बाबा को नवनाथ के नाम से जाना जाता है। गुरु गोरखनाथ इस परंपरा के प्रमुख नाथों में से एक थे। उन्हें भगवान शिव का अवतार माना जाता है और उन्हें प्राचीन भारत के महायोगी के रूप में जाना जाता है। गुरु गोरखनाथ एक योग सिद्ध योगी थे, उन्होंने हठ योग परंपरा की शुरुआत की थी। गोरखनाथ को गुरु मत्स्येन्द्रनाथ का मानस पुत्र भी कहा जाता है।

उन्हें भारत में नाथ हिंदू मठवासी आंदोलन के सबसे प्रभावशाली संस्थापकों में से एक माना जाता है।

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

गोरखनाथ | Gorakhnath

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।