॥ दोहा ॥
गोपाल नाम अमृत मधुर, भवसागर तरन जहाज।
जो नर ध्यावे प्रेम से, सिद्ध होवे सब काज॥
॥ चौपाई ॥
गोपाल सहारा तेरा है, नंदलाल सहारा तेरा है।
तू ही मेरी नैया का मांझी, तू ही किनारा मेरा है॥
जब चारों तरफ अंधेरा हो, कोई न नजर जब आए।
तेरी कृपा की एक किरण प्रभु, मन का कमल खिलाए॥
गोपाल सहारा तेरा है, नंदलाल सहारा तेरा है॥
॥ दोहा ॥
नंद के लाला गिरधारी, भक्तन के रखवार।
पूर्णिमा गावे प्रेम सों, जय जय जय सरकार॥