गोपाल सहारा तेरा है नंदलाल सहारा तेरा है

साध्वी पूर्णिमा जी (पूनम दीदी)
श्री कृष्ण भजन भजन साध्वी पूर्णिमा
॥ दोहा ॥

गोपाल नाम अमृत मधुर, भवसागर तरन जहाज।
जो नर ध्यावे प्रेम से, सिद्ध होवे सब काज॥

॥ चौपाई ॥

गोपाल सहारा तेरा है, नंदलाल सहारा तेरा है।
तू ही मेरी नैया का मांझी, तू ही किनारा मेरा है॥

जब चारों तरफ अंधेरा हो, कोई न नजर जब आए।
तेरी कृपा की एक किरण प्रभु, मन का कमल खिलाए॥

गोपाल सहारा तेरा है, नंदलाल सहारा तेरा है॥

॥ दोहा ॥

नंद के लाला गिरधारी, भक्तन के रखवार।
पूर्णिमा गावे प्रेम सों, जय जय जय सरकार॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

जीवन के कठिन समय में जब सांसारिक सहारे छूट जाते हैं, तब गोपाल और नंदलाल का सहारा ही भक्त की नैया को पार लगाता है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।