गोपाल सहारा तेरा है नंदलाल सहारा तेरा है

देवी चित्रलेखा
श्री कृष्ण भजन भजन देवी चित्रलेखा
॥ दोहा ॥

एक सहारा कृष्ण का, जग का नहीं विश्वास।
देवी चित्रलेखा गावती, पूरण करो आस॥

॥ चौपाई ॥

गोपाल सहारा तेरा है, नंदलाल सहारा तेरा है।
इस जग में ना कोई अपना, इक नाम सहारा तेरा है॥
गोपाल सहारा तेरा है॥

जब जब भी घिरी अंधेरी रात, तूने ही पकड़ा मेरा हाथ।
हर कदम पे दिया प्रभु मेरा साथ, तू ही तो है मेरा दीनानाथ॥
डगमग डोले जीवन नैया, इक तू ही तो खेवनहार मेरा है।
गोपाल सहारा तेरा है॥

संसार के ताने सहते रहे, तेरी चौखट पे हम बहते रहे।
आंसुओं की धारा में प्रभु, तेरा ही नाम हम कहते रहे॥
मेरी सूनी झोली भर देना, ये हक तो प्रभु तेरा है।
गोपाल सहारा तेरा है॥

देवी चित्रलेखा कहे हे दयाल, कृपा दृष्टि रखो नन्दलाल।
राधा रानी के चरणों में, बीता दूं मैं हर एक साल॥
चरणों में तेरे जीवन समर्पित, ये भक्ति का सवेरा है।
गोपाल सहारा तेरा है, नंदलाल सहारा तेरा है॥

॥ दोहा ॥

गोपाल नाम संजीवन, कलिमल हरण अनूप।
देवी चित्रलेखा शीश धरे, जय जय कृपा स्वरूप॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

संसार की असारता में केवल गोपाल और नन्दलाल के एकमात्र सहारे पर अटल विश्वास का भजन।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।