गोपाल कृष्ण गोस्वामी

पारंपरिक
श्री कृष्ण संत साहित्य Bhakt Gopal Krishna Goswami Bhakt
॥ पावन पाठ ॥

भक्तिमाल | गोपाल कृष्ण गोस्वामी

असली नाम - गोपाल कृष्ण

अन्य नाम - परम पूज्य गोपाल कृष्ण गोस्वामी

गुरु - श्रील प्रभुपाद

शिष्य - भक्ति आश्रय वैष्णव स्वामी

आराध्य - श्रीकृष्ण

जन्म - 14 अगस्त 1944, नई दिल्ली, अन्नदा एकादशी

निधन - 5 मई 2024 (आयु 79 वर्ष)

जन्म स्थान - दिल्ली, भारत

वैवाहिक स्थिति: विवाहित

भाषा - अंग्रेजी, संस्कृत, हिंदी

पत्नी - एकायनी देवी दासी

प्रसिद्ध - इस्कॉन गुरु, आध्यात्मिक गुरु

गोपाल कृष्ण गोस्वामी इस्कॉन द्वारका के एक प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु थे। गोपाल कृष्ण गोस्वामी महाराज श्रील प्रभुपाद के समर्पित शिष्य थे। उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि और आध्यात्मिक जीवन की खोज का संयोजन उन्हें श्रील प्रभुपाद के पास ले गया और उन्होंने 1969 की शुरुआत में उनसे दीक्षा स्वीकार कर ली। गोपाल कृष्ण गोस्वामी ने कई बार श्रील प्रभुपाद के निजी सचिव के रूप में कार्य किया है।

गोपाल कृष्ण गोस्वामी ने कई बड़े इस्कॉन मंदिरों को प्रेरित करने और पूरा करने में अग्रणी भूमिका निभाई, जैसे 1998 में नई दिल्ली में ग्लोरी ऑफ इंडिया मंदिर, इस्कॉन पुणे और नैरोबी में राधा बांकेबिहारी मंदिर। गोपाल कृष्ण गोस्वामी ने भारत में इस्कॉन के बीबीटी (अध्यक्ष और ट्रस्टी के रूप में) में बड़े पैमाने पर काम किया है, श्रील प्रभुपाद की पुस्तकों का विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद और उनके दूर-दूर तक वितरण की व्यवस्था की है।

गोपाल कृष्ण गोस्वामी दिल्ली, वृन्दावन, मुंबई, मायापुर, चंडीगढ़, केन्या, कनाडा और उत्तरी अमेरिका और रूस के कुछ हिस्सों सहित कई देशों और क्षेत्रों के गवर्निंग बॉडी कमिश्नर थे। उन्हें भारत और विदेशों में रेडियो, टेलीविजन और समाचार पत्रों में विभिन्न मुद्दों पर टिप्पणी करते हुए दिखाया गया था। वह नियमित रूप से इस्कॉन मंदिरों में व्याख्यान देते थे, भगवद गीता और श्रीमद्भागवतम जैसे विभिन्न वैष्णव ग्रंथों पर बोलते थे।

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

गोपाल कृष्ण गोस्वामी | Gopal Krishna Goswami

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।