गोपाल गोकुल वल्लभे, प्रिय गोप गोसुत वल्लभं

संत तुलसीदास
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Ram Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

गोपाल गोकुल वल्लभे,

प्रिय गोप गोसुत वल्लभं ।

चरणारविन्दमहं भजे,

भजनीय सुरमुनि दुर्लभं ॥

घनश्याम काम अनेक छवि,

लोकाभिराम मनोहरं ।

किंजल्क वसन किशोर मूरति,

भूरिगुण करुणाकरं ॥

सिरकेकी पच्छ विलोलकुण्डल,

अरुण वनरुहु लोचनं ।

कुजव दंस विचित्र सब अंग,

दातु भवभय मोचनं ॥

कच कुटिल सुन्दर तिलक,

ब्रुराकामयंक समाननं ।

अपहरण तुलसीदास,

त्रास बिहारी बृन्दाकाननं ॥

गोपाल गोकुल वल्लभे,

प्रिय गोप गोसुत वल्लभं ।

चरणारविन्दमहं भजे,

भजनीय सुरमुनि दुर्लभं ॥

- गोस्वामी तुलसीदास

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।