गीत गोविंद जगन्नाथ आरती

पारंपरिक
श्री कृष्ण आरती Aarti Shri Jagganath Aarti
॥ पावन पाठ ॥

श्रितकमलाकुचमण्डल धृतकुण्डल ए।

कलितललितवनमाल जय जय देव हरे॥

दिनमणिमण्डलमण्डन भवखण्डन ए।

मुनिजनमानसहंस जय जय देव हरे ॥

संतो की वाणी आरती लिरिक्स

कालियविषधरगंजन जनरंजन ए।

यदुकुलनलिनदिनेश जय जय देव हरे ॥

मधुमुरनरकविनाशन गरुडासन ए।

सुरकुलकेलिनिदान जय जय देव हरे ॥

अमलकमलदललोचन भवमोचन ए।

त्रिभुवनभवननिधान जय जय देव हरे ॥

जनकसुताकृतभूषण जितदूषण ए।

समरशमितदशकण्ठ जय जय देव हरे ॥

अभिनवजलधरसुन्दर धृतमन्दर ए।

श्रीमुखचन्द्रचकोर जय जय देव हरे ॥

तव चरणे प्रणता वयमिति भावय ए।

कुरु कुशलंव प्रणतेषु जय जय देव हरे ॥

श्रीजयदेवकवेरुदितमिदं कुरुते मृदम् ।

मंगलमंजुलगीतं जय जय देव हरे ॥

राधे कृष्णा हरे गोविंद गोपाला नन्द जू को लाला ।

॥ दोहा ॥

यशोदा दुलाला जय जय देव हरे ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।