घासीदास

संत कबीर
श्री राम संत साहित्य Bhakt Guru Ghasidas Bhakt
॥ पावन पाठ ॥

भक्तमाल:घासीदास

वास्तविक नाम - गुरु घासीदास

अन्य नाम - सतगुरु सतनाम, गुरु घासीदास जी

आराध्य - भगवान राम, संत कबीर दास, संत गुरु नानक

शिष्य- गुरु बालकदास

जन्म - 18 दिसम्बर 1756, छत्तीसगढ़

जन्म स्थान - गिरौदपुरी, नागपुर साम्राज्य (छत्तीसगढ़), मराठा साम्राज्य

वैवाहिक स्थिति: विवाहित

भाषा – हिन्दी

पिता - महंगू दास

माता - माता अमरौतिन

पत्नी- सफूरा माता

संस्थापक - सतनामी समाज

गुरु घासीदास 19वीं सदी की शुरुआत में सतनाम धर्म के गुरु, सतनामी संत और छत्तीसगढ़ के एक महान विद्वान थे। यह गुरु घासीदास ही थे जिन्होंने छत्तीसगढ़ के घने जंगलों वाले हिस्से में प्रचार करना शुरू किया।

गुरु घासीदास एक श्रद्धेय व्यक्तित्व थे, जिन्होंने अशांत समाज में सामाजिक न्याय, समानता, सच्चाई और शांति की वकालत की और उत्पीड़ित निचली जातियों की मदद करने का प्रयास किया। उनके अनुयायी उन्हें 'अवतारी पुरुष' मानते थे। घासीदास जातिगत भेदभाव के खिलाफ थे और उन्होंने निम्न वर्ग के लोगों के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी और सामाजिक असमानता को खारिज कर दिया। जातिगत असमानताओं की बुराइयों को दूर करने के लिए उन्होंने पूरे छत्तीसगढ़ की यात्रा की और लोगों के बीच सतनाम पंथ के महत्व का प्रचार भी किया।

गुरु घासीदास की शिक्षाएँ सिख धर्म के समान हैं और वे संत गुरु नानक के प्रशंसक थे। संत गुरु घासीदास ने छत्तीसगढ़ में सत्य और समानता पर आधारित सतनामी समाज की स्थापना की।

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

घासीदास | Ghasidas

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।