श्री घंटाकर्ण महावीर स्तोत्र

पारंपरिक
हनुमान जी स्तोत्र Mantra Shri Ghantakarna Mahavir Stotra Mantra
॥ दोहा ॥

॥ श्री घंटाकर्ण महावीर स्तोत्रम् ॥

॥ चौपाई ॥

ॐ घंटाकर्णो महावीरः सर्वव्याधि-विनाशकः।

विस्फोटक-भयं प्राप्ते, रक्ष-रक्ष महाबलः ॥१॥

यत्र त्वं तिष्ठसे देव! लिखितोऽक्षर-पंक्तिभिः।

रोगास्तत्र प्रणश्यन्ति, वात-पित्त-कफोद्भवाः ॥२॥

संतो की वाणी लिरिक्स

तत्र राजभयं नास्ति, यान्ति कर्णे जपात् क्षयम्।

शाकिनी-भूत-वेताला, राक्षसाः प्रभवन्ति नो ॥३॥

नाकाले मरणं तस्य, न च सर्पेण दृश्यते।

अग्नि-चौर-भयं नास्ति, नास्ति तस्याप्यरि-भयम् ॥४॥

ॐ ह्वीं महावीर नमोऽस्तु ते।

॥ दोहा ॥

ठः ठः ठः स्वाहा॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।