घड़ड़ दे सुनार कंगना

संत सूरदास
माता दुर्गा भजन Bhajan Maa Durga Bhajan
॥ दोहा ॥

घड़ड़ दे सुनार कंगना मैया को पहनाऊँगी ॥

॥ चौपाई ॥

कंगन जो पहने मैया बलिहारी जाउंगी॥

शेषनाग की मणि लगादे चाँद सितारे जड़ दे

सूरज की किरणों संग शोभा तीन लोक की भरदे ॥

पहना के माँ को कंगना ॥

भव तर जाउंगी घड़ड़ दे......

संतो की वाणी लिरिक्स

सात समुंदर के रत्नो से कंगन मेरा सजादे

हीरे मोती नीलम पन्ने और पुखराज लगादे॥

भेंट चड्डाह के कंगना॥

मैया को मनाऊंगी घड़ड़ दे ....

कंगन पहनो माँ जगदम्बे सोए भाग जगादो

हाथ दया का सिर पे रख दो नैया पार लगादो ॥

शेरांवाली माँ की महिमा ॥

सबको सुनाऊँगी घड़ड़ दे ........

माँ शक्ति का देख के कंगना भगत सभी हर्षाये

ये प्यारा सा कंगना माँ की शोभा और बढ़ाये ॥

कंगना की भेंट मधुर सबको सुनाऊँगी घड़ड़ दे ...........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।