विघ्नहर्ता गणेश - चरण कमल बलिहारी भजन

मीरा बाई
श्री गणेश भजन भजन श्री गणेश
॥ दोहा ॥

पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय।
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित hoy॥

॥ चौपाई ॥

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
एक दंत दयावंत चार भुजाधारी।
माथे पर तिलक सोहे मूसे की सवारी॥

संत समागम परम सुहाई, जहाँ मिले अमृत की थाई।
काम क्रोध मद लोभ मिटावे, निर्मल ज्ञान समाई॥

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
एक दंत दयावंत चार भुजाधारी।
माथे पर तिलक सोहे मूसे की सवारी॥

॥ दोहा ॥

मीरा के प्रभु गिरधर नागर, हरहु कलेश हमार।
चरण कँवल की दासी मीरा, तारो भवजल पार॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

भक्त शिरोमणि मीरा बाई का यह अनन्य प्रेम पद सांसारिक बंधनों से मुक्ति और प्रभु गिरधर के चरणों में पूर्ण समर्पण का संदेश देता है। इस पावन भजन में श्री गणेश के रिद्धि-सिद्धि दाता स्वरूप की स्तुति करते हुए साधक को अंतःकरण के विकारों से मुक्त होकर सच्चे आनंद की प्राप्ति का मार्ग दिखाया गया है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।