गणपति मेरे अँगना पधारो

पारंपरिक
श्री गणेश भजन Bhajan Vighneswaray Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

गणपति मेरे अंगना पधारो,

आस तुमसे लगाए हुए है,

काज कर दो हमारे भी पुरे,

तेरे चरणों में हम तो खड़े है,

गणपति मेरे अँगना पधारो ॥

कितनी श्रद्धा से मंडप सजाया,

अपने घर में ये उत्सव मनाया,

सच्चे मन से ये दीपक जलाया,

भोग मोदक का तुमको लगाया,

रिद्धि सिद्धि को संग लेके आओ,

हाथ जोड़े ये विनती किए है,

गणपति मेरे अँगना पधारो ॥

विघ्नहर्ता हो तुम दुःख हरते,

अपने भक्तो का मंगल हो करते,

हे चतुर्भुज हे सिद्धिविनायक,

उसकी सुखो से झोली हो भरते,

रहते शुभ लाभ संग में तुम्हारे,

हाथ पुस्तक मोदक लिए है,

गणपति मेरे अँगना पधारो ॥

करते वंदन हे गौरी के लाला,

मेरे जीवन में करदो उजाला,

पिता भोले है गणपति तुम्हारे,

सभी देवों के तुम ही हो प्यारे,

इस ‘गिरी’ की भी सुध लेलो बप्पा,

काज कितनो के तुमने किए है,

गणपति मेरे अँगना पधारो ॥

गणपति मेरे अंगना पधारो,

आस तुमसे लगाए हुए है,

काज कर दो हमारे भी पुरे,

तेरे चरणों में हम तो खड़े है,

॥ दोहा ॥

गणपति मेरे अँगना पधारो ॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

भजन: गणपति मेरे अँगना पधारो | Bhajan: Ganpati Mere Angana Padharo Lyrics Hindi Aur English Main

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।