गणपति तेरे चरणों की, पग धूल जो मिल जाए

पारंपरिक
श्री गणेश भजन Bhajan Vighneswaray Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

गणपति तेरे चरणों की,

बप्पा तेरे चरणों की,

पग धूल जो मिल जाए,

सच कहता हूँ गणपति,

तकदीर सम्भल जाए,

गणपति तेरें चरणों की ॥

सुनते है तेरी रेहमत,

दिन रात बरसती है,

इक बूँद जो मिल जाए,

मन की कली खिल जाए,

गणपति तेरें चरणों की ॥

ये मन बड़ा चंचल है,

कैसे तेरा भजन करूँ,

जितना इसे समझाऊं,

उतना ही मचल जाए,

गणपति तेरें चरणों की ॥

नजरो से गिराना ना,

चाहे जो भी सजा देना,

नजरो से जो गिर जाए,

मुश्किल ही संभल पाए,

गणपति तेरें चरणों की ॥

बप्पा इस जीवन की,

बस एक तम्मना है,

तुम सामने हो मेरे,

मेरा दम ही निकल जाए,

गणपति तेरें चरणों की ॥

गणपति तेरे चरणों की,

बप्पा तेरे चरणों की,

पग धूल जो मिल जाए,

सच कहता हूँ गणपति,

तकदीर सम्भल जाए,

॥ दोहा ॥

गणपति तेरें चरणों की ॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

भजन: गणपति तेरे चरणों की, पग धूल जो मिल जाए | Bhajan: Ganapati Tere Charno Ki Pag Dhool Jo Mil Jaye Lyrics Hindi Aur English Main

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।