गजानंद आँगन आया जी

पारंपरिक
महादेव भजन Bhajan Vighneswaray Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

म्हारा माँ गौरी का लाल,

गजानंद आंगन आया जी,

आँगन आया जी गजानंद,

आंगन आया जी,

म्हारा माँ गौरी का लाल,

गजानन्द आँगन आया जी ॥

पान चड़ाऊ फूल चड़ाऊ,

और चड़ाऊ मेवा जी,

लडूवन का तो भोग लगाऊं,

श्री गणराया जी,

म्हारा माँ गौरी का लाल,

गजानन्द आँगन आया जी ॥

रिद्धि मनाऊं सिद्धि मनाऊं,

और मनाऊं माँ गौरा जी,

शिव शंकर का ध्यान लगाऊं,

प्रथमे ध्यावा जी,

म्हारा माँ गौरी का लाल,

गजानन्द आँगन आया जी ॥

द्वार सजावा कलश सजावा,

बंदनवार लगावां जी,

धूप दीप और करा आरती,

मंगल गावां जी,

म्हारा माँ गौरी का लाल,

गजानन्द आंगन आया जी ॥

म्हारा माँ गौरी का लाल,

गजानंद आँगन आया जी,

आंगन आया जी गजानंद,

आंगन आया जी,

म्हारा माँ गौरी का लाल,

॥ दोहा ॥

गजानन्द आँगन आया जी ॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

भजन: गजानंद आँगन आया जी | Bhajan: Gajanand Aangan Aaya Ji Ke Lyrics Hindi Aur English Main

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।