फाल्गुन शुक्ल एकादशी, खाटू मेला रंग।
गुलाल उड़े चहुँ ओर में, नाचे श्याम उमंग॥
फागण की ग्यारस आई रे, खाटू में मेला भारी।
रंग गुलाल उड़ावे भक्त, जय हो श्याम तुम्हारी॥
फागण की ग्यारस आई रे॥
निशान उठा कर पैदल आए, लाखों नर और नारी।
रींगस से खाटू तक गूँजे, जय जयकार तिहारी॥
ढोल नगाड़े बाजे रे, झूमे दुनिया सारी।
फागण की ग्यारस आई रे॥
सांवरिया के मुखड़े पर, चंदा सा तेज विराजे।
अबीर गुलाल के रंगों में, मेरा श्याम सजीले साजे॥
दर्शन पाकर धन्य हुए, भक्त शरण में थारी।
फागण की ग्यारस आई रे॥
संजय मित्तल गाए फाग, खाटू के सरकार का।
सदा बना रहे प्यार हमारे, बाबा के दरबार का॥
फागण की ग्यारस आई रे, खाटू में मेला भारी॥
फागण आयो रंग रंगीलो, आयो रे त्योहार।
संजय मित्तल शीश नवावे, जय खाटू सरकार॥