फागण की ग्यारस आई रे (खाटू में मेला भारी)

संजय मित्तल
अन्य भजन भजन संजय मित्तल
॥ दोहा ॥

फाल्गुन शुक्ल एकादशी, खाटू मेला रंग।
गुलाल उड़े चहुँ ओर में, नाचे श्याम उमंग॥

॥ चौपाई ॥

फागण की ग्यारस आई रे, खाटू में मेला भारी।
रंग गुलाल उड़ावे भक्त, जय हो श्याम तुम्हारी॥
फागण की ग्यारस आई रे॥

निशान उठा कर पैदल आए, लाखों नर और नारी।
रींगस से खाटू तक गूँजे, जय जयकार तिहारी॥
ढोल नगाड़े बाजे रे, झूमे दुनिया सारी।
फागण की ग्यारस आई रे॥

सांवरिया के मुखड़े पर, चंदा सा तेज विराजे।
अबीर गुलाल के रंगों में, मेरा श्याम सजीले साजे॥
दर्शन पाकर धन्य हुए, भक्त शरण में थारी।
फागण की ग्यारस आई रे॥

संजय मित्तल गाए फाग, खाटू के सरकार का।
सदा बना रहे प्यार हमारे, बाबा के दरबार का॥
फागण की ग्यारस आई रे, खाटू में मेला भारी॥

॥ दोहा ॥

फागण आयो रंग रंगीलो, आयो रे त्योहार।
संजय मित्तल शीश नवावे, जय खाटू सरकार॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

खाटू धाम के वार्षिक ऐतिहासिक फाल्गुन लक्खी मेले और एकादशी (ग्यारस) के पावन उत्सव का यह झूमने पर विवश कर देने वाला भक्तिमय फाग भजन है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।