होली भजन: फाग खेलन बरसाने आये हैं, नटवर नंद किशोर (Holi Bhajan: Faag Khelan Barasane Aaye Hain Natwar Nand Kishore)

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Krishna Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

फाग* खेलन बरसाने आये हैं,

नटवर नंद किशोर ।

फाग खेलन बरसाने आये हैं,

नटवर नंद किशोर ।

घेर लई सब गली रंगीली,

छाय रही छबि छटा छबीली,

जिन ढोल मृदंग बजाये हैं,

बंसी की घनघोर ।

फाग खेलन बरसाने आये हैं,

नटवर नंद किशोर ।

फाग खेलन बरसाने आये हैं,

नटवर नंद किशोर ।

जुर मिल के सब सखियाँ आई,

उमड घटा अंबर में छाई,

जिन अबीर गुलाल उडाये हैं,

मारत भर भर झोर ।

फाग खेलन बरसाने आये हैं,

नटवर नंद किशोर ।

फाग खेलन बरसाने आये हैं,

नटवर नंद किशोर ।

ले रहे चोट ग्वाल ढालन पे,

केसर कीच मले गालन पे,

जिन हरियल बांस मंगाये हैं,

चलन लगे चहुँ ओर ।

फाग खेलन बरसाने आये हैं,

नटवर नंद किशोर ।

फाग खेलन बरसाने आये हैं,

नटवर नंद किशोर ।

भई अबीर घोर अंधियारी,

दीखत नही कोऊ नर और नारी,

जिन राधे सेन चलाये हैं,

पकडे माखन चोर ।

फाग खेलन बरसाने आये हैं,

नटवर नंद किशोर ।

फाग खेलन बरसाने आये हैं,

नटवर नंद किशोर ।

जो लाला घर जानो चाहो,

तो होरी को फगुवा लाओ,

जिन श्याम सखा बुलाए हैं,

बांटत भर भर झोर ।

फाग खेलन बरसाने आये हैं,

नटवर नंद किशोर ।

फाग खेलन बरसाने आये हैं,

नटवर नंद किशोर ।

राधे जू के हा हा खाओ,

सब सखियन के घर पहुँचाओ,

जिन घासीराम पद गाए हैं,

लगी श्याम संग डोर ।

फाग खेलन बरसाने आये हैं,

नटवर नंद किशोर ।

फाग खेलन बरसाने आये हैं,

नटवर नंद किशोर ।

* फाग: हिन्दी फाल्गुन माह

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।