दुर्गे भवानी तू ही काली कल्याणी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Navratri Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

दुर्गे भवानी तू ही काली कल्याणी,

तेरी शक्ति है अपार,

कोई पाया नहीं पार,

मैया जगदम्बे, जगदम्बे,

दुर्गें भवानी तू ही काली कल्याणी ॥

शुम्भ निशुम्भ ने जब देवों को हराया,

उनका स्वर्ग लिया छीन,

देव हुए बलहीन,

मैया जगदम्बे, जगदम्बे,

दुर्गें भवानी तू ही काली कल्याणी ॥

सभी देव मिल आए माँ तेरी शरण में,

तुमने काली रूप धारा,

असुरों को ललकारा,

मैया जगदम्बे, जगदम्बे,

दुर्गें भवानी तू ही काली कल्याणी ॥

रूप था भयंकर तीनों लोक थर्राए,

माँ की आँखों में थी ज्वाला,

गल में थी मुंड माला,

मैया जगदम्बे, जगदम्बे,

दुर्गें भवानी तू ही काली कल्याणी ॥

असुरों की मुंड माल गले में सजाए,

कर में खड़ग खप्पर धारे,

रण में भरती हुंकारे,

मैया जगदम्बे, जगदम्बे,

दुर्गें भवानी तू ही काली कल्याणी ॥

चंड मुंड तुमसे लड़ने रण में जब आए,

शीश दोनों के उतारे,

लाखो रक्त बीज मारे,

मैया जगदम्बे, जगदम्बे,

दुर्गें भवानी तू ही काली कल्याणी ॥

शुम्भ निशुम्भ भारी सेना लेके आए,

किया दोनों का संहार,

देवों ने की जय जयकार,

मैया जगदम्बे, जगदम्बे,

दुर्गें भवानी तू ही काली कल्याणी ॥

दुर्गे भवानी तू ही काली कल्याणी,

तेरी शक्ति है अपार,

कोई पाया नहीं पार,

मैया जगदम्बे, जगदम्बे,

दुर्गें भवानी तू ही काली कल्याणी ॥

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।