दुर्गा सप्तशती देवीमयी

पारंपरिक
महादेव मंत्र Mantra Devimayi Mantra
॥ दोहा ॥

॥ देवीमयी ॥

॥ चौपाई ॥

तव च का किल न स्तुतिरम्बिके!सकलशब्दमयी किल ते तनुः।

निखिलमूर्तिषु मे भवदन्वयोमनसिजासु बहिःप्रसरासु च॥

इति विचिन्त्य शिवे! शमिताशिवे!जगति जातमयत्नवशादिदम्।

॥ दोहा ॥

स्तुतिजपार्चनचिन्तनवर्जिता नखलु काचन कालकलास्ति मे॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।