दुनिया बनाने वाले महिमा तेरी निराली

संत सूरदास
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॥ पावन पाठ ॥

दुनिया बनाने वाले महिमा तेरी निराली ।

चन्दा बनाया शीतल सूरज में आग डाली ॥

ऊँचे शिखर गिरी के आकाश चूमते हैं ।

वृक्षों के झुरमुटे भी वायु में झूमते हैं ।

सरिताएं बहती कल कल शीतल से नीर वाली ।

चन्दा बनाया शीतल सूरज में आग डाली ।

दुनिया बनाने वाले महिमा तेरी निराली ।

चन्दा बनाया शीतल सूरज में आग डाली ॥

कही वृक्ष है रसीले कही झाड है कटीले ।

कही रेत के है टीले सरोवर कही है नीले ।

ये आसमान देखो कैसी सजी दिवाली ।

चन्दा बनाया शीतल सूरज में आग डाली ।

दुनिया बनाने वाले महिमा तेरी निराली ।

चन्दा बनाया शीतल सूरज में आग डाली ॥

सब प्राणियों के जग में तूने बनाए जोड़े ।

दुर्जन अधीक बनाए सज्जन बनाए थोड़े ।

घोड़े बनाए तूने सिंह हाथी शक्तिशाली ।

चन्दा बनाया शीतल सूरज में आग डाली ।

दुनिया बनाने वाले महिमा तेरी निराली ।

चन्दा बनाया शीतल सूरज में आग डाली ॥

जुगनू की दूम में तूने कैसा बल्ब लगाया ।

बरसात की निशाँ में जंगल है जगमगाया ।

बिजली चमक है कैसी घन की घटा है काली ।

चन्दा बनाया शीतल सूरज में आग डाली ।

दुनिया बनाने वाले महिमा तेरी निराली ।

चन्दा बनाया शीतल सूरज में आग डाली ॥

संसार की नदी सब सागर में जा रही हैं ।

सागर की तरंगें भी गुण तेरे ही गा रही हैं ।

इस विश्व वाटिका का केवल प्रभु है माली ।

चन्दा बनाया शीतल सूरज में आग डाली ।

दुनिया बनाने वाले महिमा तेरी निराली ।

चन्दा बनाया शीतल सूरज में आग डाली ॥

बच्चे किसी पे दर्जन टुकडो के भी हैं लाले ।

संतान बिन किसी के घर पे लगे हैं ताले ।

यूनान का सिकंदर गया करके हाथ खाली ।

दुनिया बनाने वाले महिमा तेरी निराली ।

चन्दा बनाया शीतल सूरज में आग डाली ॥

आवागमन का देखो कैसा ये सिलसिला है ।

थे कर्म जिसके जैसे वैसा ही फल मिला है ।

अंगूर कैसे मिलते बोई थी जब निम्बोली ।

चन्दा बनाया शीतल सूरज में आग डाली ।

दुनिया बनाने वाले महिमा तेरी निराली ।

चन्दा बनाया शीतल सूरज में आग डाली ॥

फूलो का चूस के रस कैसा मधु बनाए ।

मधुमक्खी में तूने क्या यंत्र हैं लगाए ।

मधु सबके मन को है भाय चाहे लाला हो या लाली ।

चन्दा बनाया शीतल सूरज में आग डाली ।

दुनिया बनाने वाले महिमा तेरी निराली ।

चन्दा बनाया शीतल सूरज में आग डाली ॥

पत्तो को खाके कीड़ा रेशम बना रहा है ।

है कौन जो उदर में चरखा चला रहा है ।

बुन बुन के आ रहा है रेशम का लच्छा जाली ।

चन्दा बनाया शीतल सूरज में आग डाली ।

दुनिया बनाने वाले महिमा तेरी निराली ।

चन्दा बनाया शीतल सूरज में आग डाली ॥

बरसात के दिनों में लेंटर टपकते देखा ।

बैये के घोसले में पाई ना जल की रेखा ।

क्या तकनिकी सिखाई तूने हे शिल्प शाली ।

चन्दा बनाया शीतल सूरज में आग डाली ।

दुनिया बनाने वाले महिमा तेरी निराली ।

चन्दा बनाया शीतल सूरज में आग डाली ॥

दुनिया बनाने वाले महिमा तेरी निराली ।

॥ दोहा ॥

चन्दा बनाया शीतल सूरज में आग डाली ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।