दूर नगरी, बड़ी दूर नगरी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Krishna Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

दूर नगरी, बड़ी दूर नगरी

कैसे आऊं मैं कन्हैया,

तेरी गोकुल नगरी

कैसे आऊं मैं कन्हाई,

तेरी गोकुल नगरी

बड़ी दूर नगरी

कान्हा दूर नगरी, बड़ी दूर नगरी

कान्हा दूर नगरी, बड़ी दूर नगरी

रात में आऊं तो कान्हा, डर मोहे लागे

दिन में आऊं तो, देखे सारी नगरी

बड़ी दूर नगरी

कान्हा दूर नगरी, बड़ी दूर नगरी

कैसे आऊं मैं कन्हाई, तेरी गोकुल नगरी

बड़ी दूर नगरी

सखी संग आऊं कान्हा, शर्म मोहे लागे

अकेली आऊं तो भूल जाऊ डगरी

बड़ी दूर नगरी

कान्हा दूर नगरी, बड़ी दूर नगरी

कैसे आऊं मैं कन्हाई, तेरी गोकुल नगरी

बड़ी दूर नगरी

धीरे धीरे चालूँ कान्हा, कमर मोरी लचके

झटपट चालूँ तो छलकाए गगरी

बड़ी दूर नगरी

कान्हा दूर नगरी, बड़ी दूर नगरी

कैसे आऊं मैं कन्हाई, तेरी गोकुल नगरी

बड़ी दूर नगरी

कान्हा दूर नगरी, बड़ी दूर नगरी

कैसे आऊं मैं कन्हाई, तेरी गोकुल नगरी

बड़ी दूर नगरी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।