धुला लो पाँव राघव जी, अगर जो पार जाना है

पारंपरिक
श्री राम भजन Bhajan Shri Ram Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

धुला लो पाँव राघव जी,

अगर जो पार जाना है,

पार करते हो सब जग को,

पार करते हो सब जग को,

नाव का तो बहाना है,

धुला लो पांव राघव जी,

अगर जो पार जाना है ॥

तुम्हारे चरणों की धूलि,

सुना है जादू करती है,

जो छू जाए अगर पत्थर,

तो सुन्दर नारी बनती है,

तो सुन्दर नारी बनती है,

जो पत्थर नारी बन जाए,

काठ का क्या ठिकाना है,

धुला लो पांव राघव जी,

अगर जो पार जाना है ॥

हमारी नाव ही परिवार का,

अंतिम सहारा है,

बिना इसके ओ राघव जी,

कहाँ मेरा गुजारा है,

कहाँ मेरा गुजारा है,

ये नैया जिंदगी मेरी,

ना कोई भी ठिकाना है,

धुला लो पांव राघव जी,

अगर जो पार जाना है ॥

धुला लो पाँव राघव जी,

अगर जो पार जाना है,

पार करते हो सब जग को,

पार करते हो सब जग को,

नाव का तो बहाना है,

धुला लो पांव राघव जी,

॥ दोहा ॥

अगर जो पार जाना है ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।