ढोलिडा ढोल रे वगाड़

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Maa Durga Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

ढोलिडा ढोल रे वागाड़,

मारे हिंच लेवी छे,

हिच लेवी छे,

हामे जापे जावा से,

हिच लेवी छे,

हामे जापे जावा से,

ढोलिडा ,,,,,,,,,

ढोलिडा ढोल रे वगाड़,

मारे हिंच लेवी छे,

ढोलिडा ढोल रे वगाड़,

मारे हिंच लेवी छे ॥

तारे किया भाई ने जोगळे,

हवे हिच लेवी छे,

तारे किया भाई ने जोगळे,

हवे हिच लेवी छे,

म्हारा सायबा तारी जोगळे,

मारे हिच लेवी छे,

म्हारा सायबा तारी जोगळे,

मारे हिच लेवी छे,

तारा ढोल नी माते,

डांडियों पड़े ने,

मारा हिवड़ा लेवे जाए,

मारा हिवड़ा लेवे जाए,

मारा दिलड़ा लेवे जाए,

ढोलिडा ,,,,,,,,,

ढोलिडा ढोल रे वगाड़,

मारे हिंच लेवी छे ॥

तारे किया भाई ने डांडिये,

हवे हिच लेवी छे,

तारे किया भाई ने डांडिये,

हवे हिच लेवी छे,

म्हारा सायबा तारी डांडिये,

हवे हिच लेवी छे,

म्हारा सायबा तारी डांडिये,

मारे हिच लेवी छे,

तारा ढोल नी माते,

जद डांडियों पड़े ने,

मारा हिवड़ा लेवे जाए,

मारा हिवड़ा लेवे जाए,

मारा दिलड़ा लेवे जाए,

ढोलिडा ,,,,,,,,,

ढोलिडा ढोल रे वगाड़,

मारे हिंच लेवी छे ॥

तारे किया भाई ने देशे,

हवे हिच लेवी छे,

तारे किया भाई ने देशे,

हवे हिच लेवी छे,

म्हारा सायबा तारी देशे,

हवे हिच लेवी छे,

म्हारा सायबा तारी देशे,

मारे हिच लेवी छे,

तारा ढोल नी माते,

जद डांडियों पड़े ने,

मारा हिवड़ा लेवे जाए,

मारा हिवड़ा लेवे जाए,

मारा दिलड़ा लेवे जाए,

ढोलिडा ,,,,,,,,,

ढोलिडा ढोल रे वगाड़,

मारे हिंच लेवी छे ॥

ढोलिडा ढोल रे वागाड़,

मारे हिंच लेवी छे,

हिच लेवी छे,

हामे जापे जावा से,

हिच लेवी छे,

हामे जापे जावा से,

ढोलिडा ,,,,,,,,,

ढोलिडा ढोल रे वगाड़,

मारे हिंच लेवी छे,

ढोलिडा ढोल रे वगाड़,

मारे हिंच लेवी छे ॥

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।