धारा तो बह रही है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Krishna Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

धारा तो बह रही है,

श्री राधा नाम की,

राधा राधा रटत ही,

सब व्याधा मिट जाए,

कोटि जन्म की आपदा,

श्री राधा नाम सुजाय ।

धारा तो बह रही है,

श्री राधा नाम की,

राधा धारा राधा धारा राधा धारा,

हम हो गए दीवाने श्री राधा नाम के,

हम हो गए दीवाने श्री राधा नाम के,

हम हो गए दीवाने श्री राधा नाम के,

धारा तो बह रही हैं,

श्री राधा नाम की ॥

सूझे कुछ और नाही,

वृन्दावन धाम के,

सुझे कुछ और नाही,

श्री राधा नाम के,

धारा वो बह गई हैं,

श्री राधा नाम की,

हम हो गए दीवाने श्री राधा नाम के,

हम हो गए दीवाने श्री राधा नाम के,

हम हो गए दीवाने श्री राधा नाम के,

धारा तो बह रही हैं,

श्री राधा नाम की ॥

राधा के नाम का ये,

साया घना घना है,

हर क्षण हदय में रहती,

राधा की कल्पना है,

आते नजर बिहारी,

संग राधा नाम के,

हम हो गए दीवाने श्री राधा नाम के,

हम हो गए दीवाने श्री राधा नाम के,

हम हो गए दीवाने श्री राधा नाम के,

धारा तो बह रही हैं,

श्री राधा नाम की ॥

अब भी समय है मूरख,

बुद्धि से काम ले ले,

तर जायेगा यह जीवन,

श्री राधा नाम ले ले,

नश्वर है तेरा जीवन,

बिन राधा नाम के,

हम हो गए दीवाने श्री राधा नाम के,

हम हो गए दीवाने श्री राधा नाम के,

हम हो गए दीवाने श्री राधा नाम के,

धारा तो बह रही हैं,

श्री राधा नाम की ॥

इंसान भूल है तो,

राधा क्षमा दया है,

राधा चरण मिले तो,

सोने की धुल क्या है,

ब्रह्मा भी सर झुका दे,

इस राधा नाम पे,

हम हो गए दीवाने श्री राधा नाम के,

हम हो गए दीवाने श्री राधा नाम के,

हम हो गए दीवाने श्री राधा नाम के,

धारा तो बह रही हैं,

श्री राधा नाम की ॥

विश्वास चाहता है,

तो बोल धारा धारा,

तुझको सुनाई देगा,

खुद आप राधा राधा,

धारा धारा धारा धारा धारा,

जादू अजब जुड़ा है,

संग राधा नाम के,

हम हो गए दीवाने श्री राधा नाम के,

हम हो गए दीवाने श्री राधा नाम के,

हम हो गए दीवाने श्री राधा नाम के,

धारा तो बह रही हैं,

श्री राधा नाम की ॥

धारा तो बह रही है,

श्री राधा नाम की,

राधा धारा राधा धारा राधा धारा,

हम हो गए दीवाने श्री राधा नाम के,

हम हो गए दीवाने श्री राधा नाम के,

हम हो गए दीवाने श्री राधा नाम के,

धारा तो बह रही हैं,

श्री राधा नाम की ॥

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।