ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय।
औरन को सीतल करै, आपहु सीतल hoy॥
रिद्धि सिद्धि नव निधि संग लावे, पूरण काज बनावे।
सत्य धर्म की ज्योत जगावे, सुख सम्पति बरसावे॥
कनक वर्ण तन अति मनभावन, कंचन हार विराजे।
जो ध्यावे सोई फल पावे, घर घर मंगल साजे॥
नाम जपे से पाप नशावे, जन्म मरण के फेर मिटावे।
संतन के संग मन रंग लीजै, जीवन सफल बनावे॥
कमल नयन पद्मासन सोहे, हाथ अभय वर मुद्रा।
क्षीरसागर की राजदुलारी, हरहु क्लेश कुल क्षुद्रा॥
श्री हरि संग बिराजे माता, लोक कल्याण प्रदाता।
द्वार तिहारे शीश नवाऊँ, तुम जग की सुखदाता॥
हरि ॐ तत्सत् नारायण, वासुदेव सुख रास।
जो यह पद निशदिन सुने, पूरे मन की आस॥