देवता भी स्वार्थी थे, दौड़े अमृत के लिए

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shiv Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

देवता भी स्वार्थी थे,

दौड़े अमृत के लिए,

हम सदा उनको भजेंगे,

जो जहर हंस के पिए,

हम नमन उनको करेंगे,

जो जहर हंस के पिए ॥

जो रहे अमृत के पीछे,

सोचो वो क्या देव है,

जगत के खातिर विष पिया जो,

वो बने महादेव है,

हम नमन उनको करेंगे,

हम नमन उनको करेंगे,

जो सदा सबको दिए,

हम सदा उनको भजेंगे,

जो जहर हंस के पिए ॥

औरो के खातिर जगत में,

सब नहीं जी सकते है,

जो है अविनाशी अजन्मा,

जहर वही पी सकते है,

हम नमन उनको करेंगे,

हम नमन उनको करेंगे,

जो मरे ना ना जिए,

हम सदा उनको भजेंगे,

जो जहर हंस के पिए ॥

देवता भी स्वार्थी थे,

दौड़े अमृत के लिए,

हम सदा उनको भजेंगे,

जो जहर हंस के पिए,

हम नमन उनको करेंगे,

॥ दोहा ॥

जो जहर हंस के पिए ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।