देवरहा बाबा

पारंपरिक
श्री राम संत साहित्य Bhakt Devraha Baba Bhakt
॥ पावन पाठ ॥

भक्तमाल: देवरहा बाबा

अन्य नाम - अजेय योगी, चमत्कारी बाबा

गुरु - ब्रम्हचारीजी महाराज

शिष्य - श्री पुरूषोत्तमाचार्यजी, देवदासजी (बड़े सरकार), देवराहा हंस बाबा

जन्म स्थान-देवरिया

वैवाहिक स्थिति - अविवाहित

भाषा – भोजपुरी

प्रसिद्ध-आध्यात्मिक गुरु

देवराहा बाबा उत्तर प्रदेश के सिद्ध महायोगी थे। श्री देवराहा बाबा भारत के महानतम योगियों में से एक हैं, वे जगद्गुरु श्री रामानुजाचार्य के वंश में ग्यारहवें आचार्य थे।

देवरहा बाबा को अनेक प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त थीं। कहा जाता है कि बाबा न केवल धरती पर बल्कि पानी पर भी चलते थे और किसी भी व्यक्ति को देखकर उसके मन की बात जान लेते थे। बाबा में जानवरों के मन की बात समझने की भी अद्भुत शक्ति थी। भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा था कि ''मेरे अनुभव से बाबा की आयु लगभग 150 वर्ष है।'' 12 वर्षों में एक बार आने वाले 12 प्रमुख कुंभ मेला उत्सवों में देवरहा बाबा की उपस्थिति दर्ज की गई।

वह नदी के पास 12 फुट ऊंचे (3.7 मीटर) लकड़ी के चबूतरे पर रहता थे और छोटी मृगछाला पहनते थे। लकड़ी के तख्तों की एक आड़ ने उनके अर्धनग्न शरीर को उनके भक्तों से छिपा दिया था, और वह केवल नदी में स्नान करने के लिए नीचे आते थे। वे अपने चरणों से भक्तों को आशीर्वाद देते थे। श्री देवराहा बाबा भजन/समाधि स्थल वृन्दावन में यमुना के दूसरी ओर स्थित है।

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

देवरहा बाबा | Devraha Baba

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।