देवनारायण जी की आरती

पारंपरिक
श्री राम आरती Aarti Devnarayan Ji Ki Aarti Aarti
॥ पावन पाठ ॥

जय श्री देव हरे, स्वामी जय श्री देव हरे ।

जनम जनम के पातक, क्षण में दूर करे ॥

उत्पत्ति पालन संहार से, प्रभु क्रीड़ा करता ।

देव अर्थ का निशदिन, जो हृदये धरता ॥

जय श्री देव हरे, स्वामी जय श्री देव हरे ।

सब प्रपंच का सुन लो, ईश्वर आधारा ।

नारायण शब्दार्थ लख, हरि उर धारा ॥

जय श्री देव हरे, स्वामी जय श्री देव हरे ।

देव है ब्रह्मा विष्णु, और शंकर देवा ।

देव है गुरु पितृ माता, जान करो सेवा ॥

जय श्री देव हरे, स्वामी जय श्री देव हरे ।

जब जब धर्म नशावे, पाप बढ़े भारी ।

तब तब प्रगटो स्वामी, भक्तन हितकारी ॥

जय श्री देव हरे, स्वामी जय श्री देव हरे ।

धन विद्या तुम देते, तुम सब कुछ दाता ।

तुम बिन और नाँहि, कोई नहीं आता ॥

जय श्री देव हरे, स्वामी जय श्री देव हरे ।

इष्ट देव सब जग के, हो अन्तर्यामी ।

प्राणी मात्र की रक्षा,करते तुम स्वामी ॥

जय श्री देव हरे, स्वामी जय श्री देव हरे ।

देवनारायण की आरती, हित चित से जो गावे ।

भैरा राम मन वांछित,फल निश्चित पावे ॥

जय श्री देव हरे, स्वामी जय श्री देव हरे ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।