देवी तारा की अष्टोत्तर शतनामावली

पारंपरिक
श्री कृष्ण मंत्र Mantra Devi Tara Mantra
॥ पावन पाठ ॥

देवी तारा की अष्टोत्तर शतनामावली

ॐ तारिण्यै नमः।

ॐ तरलायै नमः।

ॐ तन्व्यै नमः।

ॐ तारायै नमः।

ॐ तरुणवल्लर्यै नमः।

ॐ तीररूपायै नमः।

ॐ तर्यै नमः।

ॐ श्यामायै नमः।

ॐ तनुक्षीणपयोधरायै नमः।

ॐ तुरीयायै नमः।

ॐ तरुणायै नमः।

ॐ तीव्रगमनायै नमः।

ॐ नीलवाहिन्यै नमः।

ॐ उग्रतारायै नमः।

ॐ जयायै नमः।

ॐ चण्ड्यै नमः।

ॐ श्रीमदेकजटाशिरायै नमः।

ॐ तरुण्यै नमः।

ॐ शाम्भव्यै नमः।

ॐ छिन्नभालायै नमः।

ॐ भद्रतारिण्यै नमः।

ॐ उग्रायै नमः।

ॐ उग्रप्रभायै नमः।

ॐ नीलायै नमः।

ॐ कृष्णायै नमः।

ॐ नीलसरस्वत्यै नमः।

ॐ द्वितीयायै नमः।

ॐ शोभनायै नमः।

ॐ नित्यायै नमः।

ॐ नवीनायै नमः।

ॐ नित्यनूतनायै नमः।

ॐ चण्डिकायै नमः।

ॐ विजयाराध्यायै नमः।

ॐ देव्यै नमः।

ॐ गगनवाहिन्यै नमः।

ॐ अट्टहास्यायै नमः।

ॐ करालास्यायै नमः।

ॐ चरास्यायै नमः।

ॐ अदितिपूजितायै नमः।

ॐ सगुणायै नमः।

ॐ असगुणायै नमः।

ॐ आराध्यायै नमः।

ॐ हरीन्द्रदेवपूजितायै नमः।

ॐ रक्तप्रियायै नमः।

ॐ रक्ताक्ष्यै नमः।

ॐ रुधिरास्यविभूषितायै नमः।

ॐ बलिप्रियायै नमः।

ॐ बलिरतायै नमः।

ॐ दुर्धायै नमः।

ॐ बलवत्यै नमः।

ॐ बलायै नमः।

ॐ बलप्रियायै नमः।

ॐ बलरतायै नमः।

ॐ बलरामप्रपूजितायै नमः।

ॐ ऊर्ध्वकेशेश्वर्यै नमः।

ॐ केशायै नमः।

ॐ केशवायै नमः।

ॐ सविभूषितायै नमः।

ॐ पद्ममालायै नमः।

ॐ पद्माक्ष्यै नमः।

ॐ कामाख्यायै नमः।

ॐ गिरिनन्दिन्यै नमः।

ॐ दक्षिणायै नमः।

ॐ दक्षायै नमः।

ॐ दक्षजायै नमः।

ॐ दक्षिणेरतायै नमः।

ॐ वज्रपुष्पप्रियायै नमः।

ॐ रक्तप्रियायै नमः।

ॐ कुसुमभूषितायै नमः।

ॐ माहेश्वर्यै नमः।

ॐ महादेवप्रियायै नमः।

ॐ पञ्चविभूषितायै नमः।

ॐ इडायै नमः।

ॐ पिङ्गलायै नमः।

ॐ सुषुम्णाप्राणरूपिण्यै नमः।

ॐ गान्धार्यै नमः।

ॐ पञ्चम्यै नमः।

ॐ पञ्चाननादिपरिपूजितायै नमः।

ॐ तथ्यविद्यायै नमः।

ॐ तथ्यरूपायै नमः।

ॐ तथ्यमार्गानुसारिण्यै नमः।

ॐ तत्त्वरूपायै नमः।

ॐ तत्त्वप्रियायै नमः।

संतो की वाणी लिरिक्स

ॐ तत्त्वज्ञानात्मिकायै नमः।

ॐ अनघायै नमः।

ॐ ताण्डवाचारसन्तुष्टायै नमः।

ॐ ताण्डवप्रियकारिण्यै नमः।

ॐ तालदानरतायै नमः।

ॐ क्रूरतापिन्यै नमः।

ॐ तरणिप्रभायै नमः।

ॐ त्रपायुक्तायै नमः।

ॐ त्रपामुक्तायै नमः।

ॐ तर्पितायै नमः।

ॐ तृप्तिकारिण्यै नमः।

ॐ तारुण्यभावसन्तुष्टायै नमः।

ॐ शक्तिभक्तानुरागिण्यै नमः।

ॐ शिवासक्तायै नमः।

ॐ शिवरत्यै नमः।

ॐ शिवभक्तिपरायणायै नमः।

ॐ ताम्रद्युत्यै नमः।

ॐ ताम्ररागायै नमः।

ॐ ताम्रपात्रप्रभोजिन्यै नमः।

ॐ बलभद्रप्रेमरतायै नमः।

ॐ बलिभुजे नमः।

ॐ बलिकल्पिन्यै नमः।

ॐ रामरूपायै नमः।

ॐ रामशक्त्यै नमः।

ॐ रामरूपानुकारिण्यै नमः।

॥ दोहा ॥

॥ इति स्वर्णमालातन्त्रे श्रीतारा-अष्टोत्तरशतनामावलिः सम्पूर्णा ॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

देवी तारा की अष्टोत्तर शतनामावली | Ashtottara Shatanamavali of Devi Tara

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।