देवी राधिका आरती

पारंपरिक
श्री कृष्ण आरती Aarti Devi Radhika Aarti Aarti
॥ दोहा ॥

आरति श्रीवृषभानुलली की।सत-चित-आनन्द कन्द-कली की॥

॥ चौपाई ॥

भयभन्जिनि भव-सागर-तारिणि,पाप-ताप-कलि-कल्मष-हारिणि,

दिव्यधाम गोलोक-विहारिणि,जनपालिनि जगजननि भली की॥

आरति श्रीवृषभानुलली की।

सत-चित-आनन्द कन्द-कली की॥

अखिल विश्व-आनन्द-विधायिनि,मंगलमयी सुमंगलदायिनि,

नन्दनन्दन-पदप्रेम प्रदायिनि,अमिय-राग-रस रंग-रली की॥

आरति श्रीवृषभानुलली की।

सत-चित-आनन्द कन्द-कली की॥

नित्यानन्दमयी आह्लादिनि,आनन्दघन-आनन्द-प्रसाधिनि,

रसमयि, रसमय-मन-उन्मादिनि,सरस कमलिनी कृष्ण-अली की॥

आरति श्रीवृषभानुलली की।

सत-चित-आनन्द कन्द-कली की॥

नित्य निकुन्जेश्वरि राजेश्वरि,परम प्रेमरूपा परमेश्वरि,

गोपिगणाश्रयि गोपिजनेश्वरि,विमल विचित्र भाव-अवली की॥

आरति श्रीवृषभानुलली की।

॥ दोहा ॥

सत-चित-आनन्द कन्द-कली की॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।