देशभूषण

पारंपरिक
श्री राम संत साहित्य Bhakt Acharya Deshbhushan Bhakt
॥ पावन पाठ ॥

भक्तमालः देशभूषण

वास्तविक नाम - श्री. बाला गौड़ा पाटिल, बलप्पा

अन्य नाम - आचार्य श्री देशभूषण जी

गुरु - आचार्य जयकीर्ति

शिष्य - श्वेतपिच्छी आचार्य विद्यानंद जी, ज्ञानमती माताजी

आराध्य - दिगंबर संप्रदाय

जन्म- मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष प्रतिपदा, 1905

जन्म स्थान - कोथली, कर्नाटक

वैवाहिक स्थिति - अविवाहित

भाषा - कन्नड़, संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी, मराठी

पिता - श्री. सत्य गौड़ा

माता - अक्का देवी पाटिल

प्रसिद्ध - दिगम्बर जैन आचार्य

आचार्य देशभूषण 20वीं सदी के दिगंबर जैन आचार्य थे जिन्होंने कई कन्नड़ ग्रंथों की रचना की और उनका हिंदी और संस्कृत में अनुवाद किया। वह वर्ष 1974 में प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी के साथ भारतीय संसद का दौरा करने और संबोधित करने वाले पहले दिगंबर आचार्य हैं।

वह बहुमुखी जैन भिक्षुओं में से एक थे जिन्होंने अपना पूरा जीवन जैन धर्म के माध्यम से अहिंसा की महान अवधारणा का प्रचार और अभ्यास करने में समर्पित कर दिया है। उन्होंने श्वेतपिच्छी आचार्य विद्यानंद जी और ज्ञानमती माताजी जैसे कई जैन भिक्षुओं और भिक्षुणियों को दीक्षा दी और उनका उत्थान किया। उन्होंने अपना जीवन जैन धर्म में प्रचलित अवधारणा को उसके मूल रूप में फैलाने के लिए समर्पित कर दिया था।

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

देशभूषण | Deshbhushan

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।