देखो जी जगन्नाथ की रथ यात्रा है आई

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन Bhajan Jagannath Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

धुन- मुझे रास आ गया है तेरे दर पे सर झुकाना

देखो जी जगन्नाथ की, रथ यात्रा है आई।

सज-धज के बैठे रथ में, इक बहन अरू दो भाई॥

देखो जी.........

सोने का रथ बना है, जड़े हीरे रत्न मोती।

दिव्य झांकी दिव्य शिंगार की, शोभा कही न जाई॥

देखो जी.........

Santo Ki Vani Lyrics

स्वागत को सज गई है, सारी पुरी नगरिया,

रंग रस बरस रहे है, महकी है पुरवाई॥

देखो जी.........

रथ साथ संत भगत है, पीछे पीछे खुदाई।

रथ खींचे नाचे गावें, प्रभु को सब रिझावें,

हरिनाम की ‘‘मधुप हरि’’ गुंजार दे सुनाई॥

देखो जी.........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।