निशान सजाए हाथ में, मुख से जय जयकार।
चले दीवाने खाटू को, मिलने लखदातार॥
दीवानों की टोली खाटू को चली, खाटू को चली रे सांवरिया की गली।
हाथों में निशान लाल, मुख पे जय जयकार, दीवानों की टोली खाटू को चली॥
पैदल चल के आए रींगस के मोड़ पे, नाच रहे भक्त बाबा के जोर पे।
गुलाल उड़ रहा है अंबर में आज, सँवारेंगे बाबा हमारे सब काज॥
खुशियों की हवा चहुँ ओर चली, दीवानों की टोली खाटू को चली॥
श्याम नाम की मस्ती छाई रे, रोम रोम में तरुणाई रे।
ना कोई थकावट ना कोई दर्द, खाटू का राजा बड़ा हमदर्द॥
भक्तों की नैया पार चली, दीवानों की टोली खाटू को चली॥
संजय मित्तल गाए जयकारा, खाटू वाला लगे प्राणों से प्यारा।
दर्शन करके धन्य हो जाएँ, जीवन भर तेरे गुण गाएँ॥
दीवानों की टोली खाटू को चली, खाटू को चली रे सांवरिया की गली॥
रींगस से खाटू तलक, निशानन की कतार।
संजय मित्तल नाचे गावे, जय खाटू सरकार॥