दीनबंधु दीनानाथ मेरी सुध लीजो कन्हैया मेरी सुध लीजो

इंद्रेश जी महाराज
श्री कृष्ण भजन भजन इंद्रेश जी महाराज
॥ दोहा ॥

दीनबंधु दीनानाथ, तुम ही हो रखवार।
इंद्रेश शरण में आ पड़ा, लाज रखो सरकार॥

॥ चौपाई ॥

दीनबंधु दीनानाथ मेरी सुध लीजो।
कन्हैया मेरी सुध लीजो, सांवरिया मेरी सुध लीजो॥
दीनबंधु दीनानाथ मेरी सुध लीजो॥

मैं तो अनाथ शरण तिहारी, तुम हो कृपानिधान।
अवगुण मेरे मत चित धरियो, दीजो भक्ति दान॥
भवसागर से पार प्रभुजी कर दीजो।
दीनबंधु दीनानाथ मेरी सुध लीजो॥

दुनिया के रिश्तों को देखा, सब हैं मतलब के यार।
विपदा में कोई काम न आवे, छूटे कुल परिवार॥
अब तो केवल अपना हाथ प्रभु धर दीजो।
दीनबंधु दीनानाथ मेरी सुध लीजो॥

इंद्रेश कहे हाथ जोड़ कन्हैया, मैं हूँ तेरा दास।
तेरे सिवा न कोई जगत में, पूरण कीजो आस॥
चरण कमल में तनिक जगह प्रभु दे दीजो।
दीनबंधु दीनानाथ मेरी सुध लीजो॥

॥ दोहा ॥

कृपा दृष्टि जब तुम करो, दूर होय सब पीर।
इंद्रेश वंदन करे सदा, जय जय यदुकुल वीर॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

दीनबंधु श्री कृष्ण के चरणों में आर्त भाव से सुध लेने और भवसागर से उबारने की विनम्र प्रार्थना।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।