दे दो अपनी नौकरी, उज्जैन के महाकाल

पारंपरिक
महादेव भजन Bhajan Shiv Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

बस इतनी सी किरपा कर दो,

मेरे उज्जैन के महाकाल,

दे दो अपनी नोकरी,

उज्जैन के महाकाल,

तेरा उपकार होगा,

तेरा उपकार होगा ॥

हर दिन बाबा रोज सुबह शाम,

तेरे दर पर आऊंगा,

जल बेल पत्र भंगिया फूलो से,

तेरा श्रंगार सजाऊंगा

उज्जैन नगरी बाबा तेरी,

दुनिया में है महान,

दे दो अपनी नौकरी,

उज्जैन के महाकाल,

तेरा उपकार होगा,

तेरा उपकार होगा ॥

उज्जैन सो कोई धाम नही,

और महाकाल सो नाम नही,

कहलाते उज्जैन के राजा,

महाकाल तुमसा ना कोई,

मुझे दे दो अपनी नोकरी,

मेरे खुल जाए सब भाग,

दे दो अपनी नौकरी,

उज्जैन के महाकाल,

तेरा उपकार होगा,

तेरा उपकार होगा ॥

ना ही भटक तू जगत में बंदे,

एक सहारा तेरा ये,

सारी दुनिया झूठा झमेला,

सच्चा साथी एक ही ये,

अंत समय जो आया,

तो आएगा तु भी यहां,

दे दो अपनी नौकरी,

उज्जैन के महाकाल,

तेरा उपकार होगा,

तेरा उपकार होगा ॥

बस इतनी सी किरपा कर दो,

मेरे उज्जैन के महाकाल,

दे दो अपनी नौकरी,

उज्जैन के महाकाल,

तेरा उपकार होगा,

॥ दोहा ॥

तेरा उपकार होगा ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।