दत्ताची आरती

पारंपरिक
अन्य आरती Aarti Datta Aarti
॥ पावन पाठ ॥

त्रिगुणात्मक त्रैमूर्ती दत्त हा जाणा ।

त्रिगुणी अवतार त्रैलोक्य राणा ।

नेती नेती शब्द न ये अनुमाना ॥

सुरवर मुनिजन योगी समाधी न ये ध्याना ॥

जय देव जय देव जय श्री गुरुद्त्ता ।

आरती ओवाळिता हरली भवचिंता ॥

सबाह्य अभ्यंतरी तू एक द्त्त ।

अभाग्यासी कैची कळेल हि मात ॥

पराही परतली तेथे कैचा हेत ।

जन्ममरणाचाही पुरलासे अंत ॥

दत्त येऊनिया ऊभा ठाकला ।

भावे साष्टांगेसी प्रणिपात केला ॥

प्रसन्न होऊनि आशीर्वाद दिधला ।

जन्ममरणाचा फेरा चुकवीला ॥

दत्त दत्त ऐसें लागले ध्यान ।

हरपले मन झाले उन्मन ॥

मी तू पणाची झाली बोळवण ।

॥ दोहा ॥

एका जनार्दनी श्रीदत्तध्यान ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।