॥ दोहा ॥
दाता एक राम, भिखारी सारी दुनिया।
राम एक देवता, पुजारी सारी दुनिया॥
॥ चौपाई ॥
दाता एक राम, भिखारी सारी दुनिया॥
किसके सिर पर मुकुट सजाया, किसको दिया वनवास।
जिसके मन में राम बसे हैं, वही प्रभु का दास॥
दाता एक राम...
महल अटारी यहीं रहेंगी, छूटेगा सब राज।
प्रभु के आगे काम न आएगा, धन और तख़्त-ओ-ताज॥
दाता एक राम...
मांगना है तो राम से मांगो, जो जग का आधार।
जिसकी कृपा से पल भर में, हो जाए भव पार॥
दाता एक राम...
॥ दोहा ॥
राम नाम के जाप से, कटें सकल भव फंद।
सच्चा दाता राम है, परमानंद कंद॥