दर्शन को अखियाँ प्यासी है, कब दर्शन होगा श्याम धणी

संत सूरदास
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Krishna Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

दर्शन को अखियाँ प्यासी है,

कब दर्शन होगा श्याम धणी,

मुझ निर्धन के घर आँगन में,

कब आवन होगा श्याम धणी,

दर्शन को अखियां प्यासी है,

कब दर्शन होगा श्याम धणी ॥

मेरे घर में तुम्हे बिठाने को,

ना चौकी ना सिंहासन है,

ना दीपक ना बाती है,

ना अक्षत है ना चंदन है,

श्रद्धा के फूलों से तेरा,

अभिनन्दन होगा श्याम धणी,

दर्शन को अखियां प्यासी है,

कब दर्शन होगा श्याम धणी ॥

सावन भादों दोनों बीते,

और बीती होली दिवाली है,

पर मुझे देखने नहीं मिली,

तेरी सूरत भोली भाली है,

ना जाने किस दिन अखियों को,

पग दर्शन होगा श्याम धणी,

दर्शन को अखियां प्यासी है,

कब दर्शन होगा श्याम धणी ॥

दर्शन को अखियाँ प्यासी है,

कब दर्शन होगा श्याम धणी,

मुझ निर्धन के घर आँगन में,

कब आवन होगा श्याम धणी,

दर्शन को अखियां प्यासी है,

॥ दोहा ॥

कब दर्शन होगा श्याम धणी ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।