दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी

संत सूरदास
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Krishna Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी,

अँखियाँ प्यासी रे ।

मन मंदिर की जोत जगा दो,

घट घट वासी रे ॥

मंदिर मंदिर मूरत तेरी,

फिर भी न दीखे सूरत तेरी ।

युग बीते ना आई मिलन की,

पूरनमासी रे ॥

दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी,

अँखियाँ प्यासी रे ।

द्वार दया का जब तू खोले,

पंचम सुर में गूंगा बोले ।

अंधा देखे लंगड़ा चलकर,

पँहुचे काशी रे ॥

दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी,

अँखियाँ प्यासी रे ।

पानी पी कर प्यास बुझाऊँ,

नैनन को कैसे समझाऊं ।

आँख मिचौली छोड़ो अब तो,

मन के वासी रे ॥

दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी,

अँखियाँ प्यासी रे ।

निबर्ल के बल धन निधर्न के,

तुम रखवाले भक्त जनों के ।

तेरे भजन में सब सुख़ पाऊं,

मिटे उदासी रे ॥

दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी,

अँखियाँ प्यासी रे ।

नाम जपे पर तुझे ना जाने,

उनको भी तू अपना माने ।

तेरी दया का अंत नहीं है,

हे दुःख नाशी रे ॥

दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी,

अँखियाँ प्यासी रे ।

आज फैसला तेरे द्वार पर,

मेरी जीत है तेरी हार पर ।

हर जीत है तेरी मैं तो,

चरण उपासी रे ॥

दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी,

अँखियाँ प्यासी रे ।

द्वार खडा कब से मतवाला,

मांगे तुम से हार तुम्हारी ।

नरसी की ये बिनती सुनलो,

भक्त विलासी रे ॥

दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी,

अँखियाँ प्यासी रे ।

लाज ना लुट जाए प्रभु तेरी,

नाथ करो ना दया में देरी ।

तिन लोक छोड़ कर आओ,

गंगा निवासी रे ॥

दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी,

अँखियाँ प्यासी रे ।

मन मंदिर की जोत जगा दो,

घट घट वासी रे ॥

Movie: नरसी भगत १९५७ - Narsi Bhagat

Singers: हेमंत कुमार मुखोपाध्याय - Hemant Kumar

Lyricists: गोपाल सिंह नेपाली - G S Nepali

Music Director: रवि शंकर शर्मा (रवि) - Ravi

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।