दरबार सजा तेरा न्यारा, निरखत निरखत मैं हारा

संत सूरदास
श्री राम भजन Bhajan Hanuman Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

दरबार सजा तेरा न्यारा,

निरखत निरखत मैं हारा ॥

सालासर थारो भवन विराजे,

झालर शंख नगाड़ा बाजे,

थारा सूरज सामी सा द्वारा,

निरखत निरखत मैं हारा ॥

दूर देश से चल कर आवां,

नाचां गावां थाने रिझावन,

थे हो भक्तां का पालनहारा,

निरखत निरखत मैं हारा ॥

चैत सुदी पूनम को मेलो,

भक्तां को लागो है रेलों,

थारे नाम का गूंजे जयकारा,

निरखत निरखत मैं हारा ॥

माँ अंजनी का लाल कहावो,

राम की महिमा हर दम गावो,

म्हारी नैया करयो भव पारा,

निरखत निरखत मैं हारा ॥

दरबार सजा तेरा न्यारा,

॥ दोहा ॥

निरखत निरखत मैं हारा ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।