दरश को प्यासे है, मैया मेरे नैन

पारंपरिक
महादेव भजन Bhajan Mata Rani Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

दरश को प्यासे है,

मैया मेरे नैन,

एक झलक दिखलाओ भवानी,

तो आए भक्त को चैन,

दरश को प्यासे हैं,

मैया मेरे नैन ॥

लगन लगाकर कब से बैठे,

दर पर तेरे सवाली,

पाप ताप संताप हरो माँ,

अम्बै दुर्गे काली,

और जुदाई ना होती अब,

हम से मैया सहन,

दरश को प्यासे हैं,

मैया मेरे नैन ॥

दसों दिशा में तेरा नूर माँ,

नहीं जगह कोई खाली,

श्रृष्टि पालन हार तू ही है,

मैया शेरावाली,

हाथ दया का रख सर पर मां,

बीत जाएं ना रेन,

दरश को प्यासे हैं,

मैया मेरे नैन ॥

शिव शक्ति हे आदि भवानी,

मैं तेरा रूप निहारूं,

अष्टभुजी तत्काल आओ मां,

प्रेम से तुम्हें पुकारू,

मेरा जीवन धन्य करो मां,

जो है तेरा ही है देन,

दरश को प्यासे हैं,

मैया मेरे नैन ॥

ऋषि देवता और गंधर्व ने,

तेरा ही गुण गाया,

‘सुरेन्द्र सिंह’ भी संगत संग माँ,

शरण तेरी में आया,

पुर्ण इच्छा करने वाली,

मां सुन मेरा भी कहन,

दरश को प्यासे हैं,

मैया मेरे नैन ॥

दरश को प्यासे है,

मैया मेरे नैन,

एक झलक दिखलाओ भवानी,

तो आए भक्त को चैन,

दरश को प्यासे हैं,

मैया मेरे नैन ॥

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।