डंके की चोट पे कह दो खाटू वाला मेरा है

कन्हैया मित्तल
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॥ दोहा ॥

डंके की चोट पे गाओ, सांवरिया सरकार।
जिसके सिर पर मोरछड़ी, वो जग का सरदार॥

॥ चौपाई ॥

डंके की चोट पे कह दो, खाटू वाला मेरा है।
मेरी नैया का माझी, सांवरिया सवेरा है॥
डंके की चोट पे कह दो॥

ना डरना जमाने से, ना किसी से घबराना।
जब साथ है लखदाता, तो क्या है पछताना॥
सारे जग में गूँज उठा, बाबा का जो फेरा है।
डंके की चोट पे कह दो, खाटू वाला मेरा है॥

जिसने पकड़ी चौखट, उसका भाग्य संवर गया।
खाली दामन था जिसका, खुशियों से भर गया॥
अमृत बरसता है खाटू में, मिटता अंधेरा है।
डंके की चोट पे कह दो, खाटू वाला मेरा है॥

कन्हैया मित्तल कहे गर्व से, सुन लो दीवानों।
श्याम नाम ही सच्चा, इस बात को पहचानो॥
डंके की चोट पे कह दो, खाटू वाला मेरा है, मेरी नैया का माझी, सांवरिया सवेरा है॥

॥ दोहा ॥

सांवरिया के दर पे जो, शीश नवाए दास।
कन्हैया मित्तल की प्रभु, पूरण कीजे आस॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

बिना किसी संकोच के संसार के सामने यह घोषणा करने का भजन कि खाटू श्याम जी हमारे हैं और उनकी छत्रछाया में हमारा जीवन पूर्णतः सुरक्षित है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।