डमरू वाले आजा, तेरी याद सताए

पारंपरिक
महादेव भजन Bhajan Shiv Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

डमरू वाले आजा,

तेरी याद सताए,

मेरा ये भरोसा,

कहीं टूट ना जाए,

छुपा कहाँ आजा भोलेनाथ,

डमरू वालें आजा,

तेरी याद सताए,

मेरा ये भरोसा,

कहीं टूट ना जाए ॥

मन ये पुकारे दिल के सहारे,

नैना हमारे तेरा रस्ता निहारे,

हर पल विचारे,

छुपा कहाँ आजा भोलेनाथ,

डमरू वालें आजा,

तेरी याद सताए,

मेरा ये भरोसा,

कहीं टूट ना जाए ॥

दिल कि ये धड़कन,

गीत तेरे गाये,

रोती है अखियाँ नीर बहाए,

कैसे समझाये,

छुपा कहाँ आजा भोलेनाथ,

डमरू वालें आजा,

तेरी याद सताए,

मेरा ये भरोसा,

कहीं टूट ना जाए ॥

डमरू वाले आजा,

तेरी याद सताए,

मेरा ये भरोसा,

कहीं टूट ना जाए,

छुपा कहाँ आजा भोलेनाथ,

डमरू वालें आजा,

तेरी याद सताए,

मेरा ये भरोसा,

॥ दोहा ॥

कहीं टूट ना जाए ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।