छोटी छोटी सखियाँ संग अम्बे मात

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Navratri Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

छोटी छोटी सखियाँ संग अम्बे मात,

झूला झूलें मैया सखियों के साथ,

झूला झूलें मैया सखियों के साथ ॥

चुनरी सितारों वाली सखियाँ लाई साथ,

चुनरी सितारों वाली सखियाँ लाई साथ,

लाल लाल चुनरी में सजी अम्बे मात,

लाल लाल चुनरी में सजी अम्बे मात,

छोटीं छोटीं सखियाँ संग अम्बे मात,

झूला झूलें मैया सखियों के साथ,

झूला झूलें मैया सखियों के साथ ॥

सखियाँ सजा के लाई मेहंदी की थाल,

सखियाँ सजा के लाई मेहंदी की थाल,

प्रेम से रचाई अम्बे मैया जी के हाथ,

प्रेम से रचाई अम्बे मैया जी के हाथ,

छोटीं छोटीं सखियाँ संग अम्बे मात,

झूला झूलें मैया सखियों के साथ,

झूला झूलें मैया सखियों के साथ ॥

लाल हरी चूड़ियां सखियाँ लाई साथ,

लाल हरी चूड़ियां सखियाँ लाई साथ,

प्रेम से पहनाई मेरी मैया जी के हाथ,

प्रेम से पहनाई मेरी मैया जी के हाथ,

छोटीं छोटीं सखियाँ संग अम्बे मात,

झूला झूलें मैया सखियों के साथ,

झूला झूलें मैया सखियों के साथ ॥

सोने का कमरबंद सखियाँ लाई साथ,

सोने का कमरबंद सखियाँ लाई साथ,

श्रद्धा से किया अम्बे माँ का श्रृंगार,

श्रद्धा से किया अम्बे माँ का श्रृंगार,

छोटीं छोटीं सखियाँ संग अम्बे मात,

झूला झूलें मैया सखियों के साथ,

झूला झूलें मैया सखियों के साथ ॥

सोने की पायल बिछुए चांदी लेके साथ,

सोने की पायल बिछुए चांदी लेके साथ,

मैया को पहना के भागे सखियों के भाग,

मैया को पहना के भागे सखियों के भाग,

छोटीं छोटीं सखियाँ संग अम्बे मात,

झूला झूलें मैया सखियों के साथ,

झूला झूलें मैया सखियों के साथ ॥

छोटी छोटी सखियाँ संग अम्बे मात,

झूला झूलें मैया सखियों के साथ,

झूला झूलें मैया सखियों के साथ ॥

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।