चित्र विचित्र सा रूप सलोना मेरे बांके बिहारी का

चित्र विचित्र जी महाराज
श्री कृष्ण भजन भजन चित्र विचित्र जी
॥ दोहा ॥

अद्भुत छवि बांके प्रभु, नैनन में रस घोल।
चित्र विचित्र हिय में बसे, बांके बिहारी बोल॥

॥ चौपाई ॥

चित्र विचित्र सा रूप सलोना, मेरे बांके बिहारी का।
जादूगर सा जादू कर दे, काम यही बनवारी का॥
चित्र विचित्र सा रूप सलोना, मेरे बांके बिहारी का॥

टेढ़ी कमर है टेढ़े नैन, टेढ़ी बंशी बजावे।
टेढ़े पाँव धरे यमुना तट, गोपिन मन बहकावे॥
सबको दीवाना कर डारे, ये नटखट गिरधारी का।
चित्र विचित्र सा रूप सलोना, मेरे बांके बिहारी का॥

कानों में कुंडल चमके, शीश पे मुकुट विराजे।
गल में पुष्पों की माला, पायल छन छन बाजे॥
हर कोई दास बना बैठा, इस कुंजबिहारी का।
चित्र विचित्र सा रूप सलोना, मेरे बांके बिहारी का॥

चित्र विचित्र कहे छवि पे मोहित, बांके नाथ हमारे।
हम तो तेरे होके रहे, तू ही भाग्य संवारे॥
चरणों में स्थान मिले तो, जीवन सफल पुजारी का।
चित्र विचित्र सा रूप सलोना, मेरे बांके बिहारी का॥

॥ दोहा ॥

बांकी झांकी बांके नैन, बांकी चाल रसाल।
चित्र विचित्र वंदन करे, जय बांकेबिहारी लाल॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

भाई चित्र विचित्र जी महाराज का सुप्रसिद्ध हस्ताक्षर भजन, जिसमें बांके बिहारी जी के अद्भुत, त्रिभंगी और मोहक रूप का गुणगान किया गया है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।