गुरुमाई चिद्विलासानंद

पारंपरिक
महादेव संत साहित्य Bhakt Gurumayi Chidvilasananda Bhakt
॥ पावन पाठ ॥

भक्तमाल | गुरुमाई चिद्विलासानंद

असली नाम: मालती शेट्टी

अन्य नाम - गुरुमाई, स्वामी चिद्विलासानंद

गुरु: स्वामी मुक्तानंद

आराध्य: भगवान शिव

जन्म: 24 जून 1955

जन्म स्थान: मंगलौर, भारत

वैवाहिक स्थिति: अविवाहित

पिता: शीना शेट्टी

माता: देवकी शेट्टी

प्रसिद्धि: आध्यात्मिक संत

संस्थापक - गणेशपुरी, महाराष्ट्र में गुरुदेव सिद्ध पीठ

गुरुमाई चिद्विलासानंद एक भारतीय आध्यात्मिक गुरु और सिद्ध योग परंपरा की प्रमुख हैं। 24 जून 1955 को मालती शेट्टी के रूप में जन्मीं, वे कम उम्र में ही स्वामी मुक्तानंद की शिष्या बन गईं। 1982 में, अपनी मृत्यु से कुछ समय पहले, मुक्तानंद ने उन्हें अपने उत्तराधिकारियों में से एक के रूप में नामित किया। 1985 से, वह सिद्ध योग की एकमात्र आध्यात्मिक प्रमुख के रूप में सेवा कर रही हैं।

गुरुमाई ने कई आध्यात्मिक पुस्तकें लिखी हैं, जिनमें 'किंडल माई हार्ट' (Kindle My Heart), 'एशेज एट माई गुरुज फीट' (Ashes at My Guru's Feet) और 'द मैजिक ऑफ द हार्ट' (The Magic of the Heart) शामिल हैं। उन्होंने सिद्ध योग समुदाय से जुड़ी संस्थाओं के माध्यम से शैक्षिक और मानवीय पहलों का भी समर्थन किया है।

उनकी शिक्षाएं इन पर आधारित हैं:

❀ ध्यान

❀ आत्म-खोज

❀ जप (मंत्र और भक्ति संगीत)

❀ कुंडलिनी जागरण (सिद्ध योग परंपरा में इसे शक्तिपात के रूप में जाना जाता है)

❀ अद्वैत कश्मीर शैववाद और वेदांत का दर्शन

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

गुरुमाई चिद्विलासानंद एक भारतीय आध्यात्मिक गुरु और सिद्ध योग परंपरा की प्रमुख हैं। 24 जून 1955 को मालती शेट्टी के रूप में जन्मीं, वे कम उम्र में ही स्वामी मुक्तानंद की शिष्या बन गईं। Gurumayi Chidvilasananda is an Indian spiritual teacher and the leader of the Siddha Yoga tradition. Born Malti Shetty on 24 June 1955, she became a disciple of Swami Muktananda at a young age.

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।