छोटो सो मेरो मदन गोपाल

देवी चित्रलेखा
श्री कृष्ण भजन भजन देवी चित्रलेखा
॥ दोहा ॥

बाल रूप सांवरिया का, अतिशय सुंदर रूप।
देवी चित्रलेखा गावती, मनमोहन स्वरूप॥

॥ चौपाई ॥

छोटो सो मेरो मदन गोपाल।
छोटो सो, मेरो छोटो सो॥
छोटो सो मेरो मदन गोपाल॥

माथे मुकुट घुंघराले बाल।
कानन कुंडल झलके लाल॥
ठुमक ठुमक पग धरत कन्हैया।
पैजनिया बाजे ताल बेताल॥
छोटो सो मेरो मदन गोपाल॥

यशोदा मैया गोद खिलावे।
माखन मिश्री भोग लगावे॥
गोपियां देख देख बलिहारी।
मगन भयो री ब्रज का ग्वाल॥
छोटो सो मेरो मदन गोपाल॥

देवी चित्रलेखा गावे हरषाई।
धन्य यशोदा धन्य कन्हाई॥
बाल रूप हिय में जो बसावे।
मिट जाए उसके सकल जंजाल॥
छोटो सो मेरो मदन गोपाल॥

॥ दोहा ॥

बाल मुकुंद सलोनड़े, नैनन बसे सनेह।
देवी चित्रलेखा वंदन करे, पावे निर्मल देह॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप मदन गोपाल के नटखट वात्सल्य और नूपुरों की मधुर झंकार का अत्यंत प्रिय संकीर्तन।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।