॥ दोहा ॥
छाप तिलक सब छीनी रे तोसे नैना मिलाइके।
बात अगम कह दीनी रे तोसे नैना मिलाइके॥
॥ चौपाई ॥
प्रेम भटी का मदवा पिलाइके।
मतवारी कर लीनी रे तोसे नैना मिलाइके॥
छाप तिलक सब छीनी...
गोरी गोरी बइयाँ, हरी हरी चूड़ियाँ।
बइयाँ पकड़ धर लीनी रे तोसे नैना मिलाइके॥
छाप तिलक सब छीनी...
बल बल जाऊं मैं तोरे रंग रजवा।
अपनी सी रंग दीनी रे तोसे नैना मिलाइके॥
छाप तिलक सब छीनी...
॥ दोहा ॥
खुसरो निज़ाम के बल-बल जाइए।
मोहे सुहागन कीनी रे तोसे नैना मिलाइके॥