छाप तिलक सब छीनी तोसे नैना मिलाइके

अमीर खुसरो
अन्य भजन भजन सूफी भक्ति
॥ दोहा ॥

छाप तिलक सब छीनी रे तोसे नैना मिलाइके।
बात अगम कह दीनी रे तोसे नैना मिलाइके॥

॥ चौपाई ॥

प्रेम भटी का मदवा पिलाइके।
मतवारी कर लीनी रे तोसे नैना मिलाइके॥
छाप तिलक सब छीनी...

गोरी गोरी बइयाँ, हरी हरी चूड़ियाँ।
बइयाँ पकड़ धर लीनी रे तोसे नैना मिलाइके॥
छाप तिलक सब छीनी...

बल बल जाऊं मैं तोरे रंग रजवा।
अपनी सी रंग दीनी रे तोसे नैना मिलाइके॥
छाप तिलक सब छीनी...

॥ दोहा ॥

खुसरो निज़ाम के बल-बल जाइए।
मोहे सुहागन कीनी रे तोसे नैना मिलाइके॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

ईश्वरीय प्रेम में आत्म-विस्मृति और अहंकार के विसर्जन का कालजयी रहस्यवादी सूफी-भक्ति पद।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।