छलिया का वेश बनाया श्याम चूड़ी बेचने आया

मृदुल कृष्ण शास्त्री
श्री कृष्ण भजन भजन मृदुल कृष्ण शास्त्री
॥ दोहा ॥

मनमोहन छल बल करे, राधा मिलन के हेत।
मनिहारी का रूप धर, बरसाने संकेत॥

॥ चौपाई ॥

छलिया का वेश बनाया, श्याम चूड़ी बेचने आया।
चूड़ी हरी हरी, चूड़ी भरी भरी॥
छलिया का वेश बनाया, श्याम चूड़ी बेचने आया॥

राधा जी के द्वार पे आके, आवाज़ लगाई प्यारी।
ले लो री चूड़ी रंग-बिरंगी, आई है मनिहारी॥
सखियों ने जब सुना ये स्वर, मन में अचरज पाया।
छलिया का वेश बनाया, श्याम चूड़ी बेचने आया॥

राधा जी ने हाथ बढ़ाया, कंगन जब पहनाने लगा।
स्पर्श हुआ जब सांवरिया का, प्रेम हिया उमगाने लगा॥
घूंघट हटा के देखा राधा, नंदलाल नज़र में आया।
छलिया का वेश बनाया, श्याम चूड़ी बेचने आया॥

मृदुल कृष्ण गावे ये लीला, अद्भुत प्रेम कहानी।
छलिया बनके दर्श दियो, जय राधा पटरानी॥
छलिया का वेश बनाया, श्याम चूड़ी बेचने आया॥

॥ दोहा ॥

मनिहारी बन नटवर नागर, पहरावे कंकन।
मृदुल कृष्ण रस में डूबे, रीझे श्री वृषभानु सदन॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

श्री कृष्ण के मनिहारी (चूड़ी बेचने वाली) बनकर बरसाने में श्री राधा जी को चूड़ी पहनाने जाने की आनंदमयी रस लीला।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।