चौसठ जोगणी रे भवानी: राजस्थानी भजन (Chausath Jogani Re Bhawani, Dewaliye Ramajay)

पारंपरिक
श्री राम भजन Bhajan Maa Durga Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

चौसठ जोगणी रे भवानी,

देवलिये रमजाय,

घूमर घालणि रे भवानी,

देवलिये रमजाय ॥

देवलिये रमजाय म्हारे,

आंगणिये रमजाय,

चौसठ जोगणी रे भवानी,

देवलिये रमजाय,

घूमर घालणि रे भवानी,

देवलिये रमजाय ॥

हंस सवारी कर मोरी मैया,

ब्रम्हा रूप बणायो,

ब्रम्हा रूप बणायो नवदुर्गा,

ब्रम्हा रूप बणायो,

चार वेद मुख चार बिराजे,

चारा रो जस गायो ॥

घूमर घालनी रे भवानी,

देवलिये रमजाय ॥

गरुड़ सवारी कर मेरी मैया,

विष्णु रूप बणायो,

विष्णु रूप बणायो नवदुर्गा,

विष्णु रूप बणायो,

गदा पदम संग चक्र बिराजे,

मधुबन रास रचायो ॥

घूमर घालनी रे भवानी,

देवलिये रमजाय ॥

नंदी सवारी कर मेरी मैया,

शक्ति रूप बणायो,

शक्ति रूप बणायो नवदुर्गा,

शक्ति रूप बणायो,

जटा मुकुट मै गंगा खळके,

शेष नाग लीपटायो ॥

घूमर घालनी रे भवानी,

देवलिये रमजाय ॥

सिंघ सवारी कर मेरी मैया,

शक्ति रूप बणायो,

शक्ति रूप बणायो नवदुर्गा,

शक्ति रूप बणायो,

सियाराम तेरी करे स्तुति,

भक्त मंडल जस गायो ॥

घूमर घालनी रे भवानी,

देवलिये रमजाय ॥

चौसठ जोगणी भवानी,

देवलिये रमजाय,

घूमर घालणि रे भवानी,

॥ दोहा ॥

देवलिये रमजाय ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।